भंते सुमेधानंद और उनकी विज्ञान (भाग Book 1) (Hindi Edition) por सुमेध जग्रवाल

भंते सुमेधानंद और उनकी विज्ञान (भाग Book 1) (Hindi Edition) por सुमेध जग्रवाल

Titulo del libro : भंते सुमेधानंद और उनकी विज्ञान (भाग Book 1) (Hindi Edition)
Fecha de lanzamiento : January 24, 2018
Autor : सुमेध जग्रवाल
Número de páginas : 98

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सुमेध जग्रवाल con भंते सुमेधानंद और उनकी विज्ञान (भाग Book 1) (Hindi Edition)

हिन्दू , मुस्लिम और ईसाई यह विदेशी काल्पनिक संस्कृति हैं जो भारतीयों को आपस में विभाजित करके वर्ग संघर्ष कराती हैं । बुद्ध ने पूजा पाठ और अंधविश्वास का मार्ग नही दिया । उन्होंने अपने पूजने का ज्ञान नही दिया । उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा , मैं मोक्ष दाता नही , विज्ञानी मार्ग दाता हूँ । उन्होंने संसार के लिए विज्ञानी मार्ग दिया था । जिसको विज्ञानी ज्ञान मानना है वो माने । जिनको अंधविश्वास मानना है , वे अंधविश्वास को माने । तथागत बुद्ध और उसके अनुयायी कभी नही कहते कि आप बुद्ध मार्ग को मानो । वे आपको उस मार्ग का मार्ग दर्शन करते हैं । आपको यह विज्ञानी ज्ञान अच्छा लगे तो अनुसरण करो अन्यथा मत करो । तथागत ने यह भी मार्ग दर्शित किया कि जो वस्तु आपको अपनी पाँचों ज्ञानेन्द्रियों से महसूस होती है , उसी का अनुसरण करें , शेष सब बकवास है । इसी आधार पर सभी सरकारी व्यवहार में तथागत बुद्ध के मार्ग का अनुसरण किया गया है , तीनों विदेशी संस्कृतियों का नही । यदि उक्त तीनों संस्कृतियाँ देशी होती तो हर सरकारी कार्य में उनका ही अनुसरण होता । भारतीय संविधान भी इन तीनों संस्कृतियों को विदेशी ही मानता है । संविधान के अनुच्छेद - 46 में लिखा है कि भारत की हर वस्तु पर भारतीय मूलवासियों का ही आधिपत्य होगा ।
न्यूटन के पहले भी गुरुत्वाकर्षण था , लेकिन उसका ज्ञान नही था । उसका ज्ञान न्यूटन ने कराया था । इसी प्रकार ब्राह्मणी लोगों को अपने धर्म ग्रन्थों के सम्बन्ध में इससे पहले ज्ञान नही था , अब उनको अपने अश्लील धर्म ग्रन्थों के बारे में ज्ञान कराया जा रहा है । पहले ब्राह्मणी मीडिया था जो हमारी सम्यक बातों को अनसुना करता था । लेकिन आज अंतर्राष्ट्रीय मीडिया है , जिसके माध्यम से हम भारतीय लोग तीनों विदेशी संस्कृतियों की असलियत भारतीय लोगों के समक्ष ला रहे हैं । ब्राह्मणी लोग आजादी से पूर्व अपने आपको ब्राह्मण , क्षत्रिय और वैश्य बोलते थे और भारतीय लोगों को शूद्र और अतिशूद्र बोलते थे । लेकिन आजादी के बाद ब्राह्मणी लोगों ने देखा कि सत्ता अब बहुमत से बनेगी तो उन्होंने भारतीय लोगों को शूद्र के स्थान पर हिन्दू बोलना आरम्भ कर दिया । जबकि ब्राह्मणवाद का कोई भी सदस्य अपने आपको हिन्दू नही बोलता है , वह अपने आपको वर्णों के अनुसार ही दर्शित करता है । जब उन पर कोई आपत्ति या सत्ता की बात होती है , तो वह हिन्दू हिन्दू चिल्लाता है । अन्यथा वह अपने आपको हिन्दू कभी नही कहता । इसी प्रकार आज तक ये ब्राह्मणी लोग भारत के लोगों को मूर्ख बनाते आये हैं । वर्तमान परिवेश को देख उनको अपनी अश्लील व्यवस्था को त्यागना ही होगा , उसी में उनका भला है । भंते सुमेधानंद और उनकी विज्ञान नामक पुस्तक में वार्तालाप को एक विज्ञानी रूप देकर प्रमाणित किया है । जो लोग पाखण्डी और अंधविश्वासी हैं , उनको ये वार्तालाप कड़वा लगेगा , परन्तु सत्य का ज्ञान होने पर ये ही कड़वापन उनको मीठा लगने लगेगा ।


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